Sunita Ahuja on Marriage Roles: पति-बच्चों से आगे भी है महिलाओं की अपनी जिंदगी, बोलीं- खुद के लिए समय निकालना जरूरी

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Sunita Ahuja speaks about marriage roles, women's personal identity and the importance of taking time for themselves.

Sunita Ahuja on Marriage Roles: पति-बच्चों से आगे भी है महिलाओं की अपनी जिंदगी, बोलीं- खुद के लिए समय निकालना जरूरी

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा की पत्नी Sunita Ahuja ने महिलाओं की शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक बेबाक राय साझा की है। एक इंटरव्यू में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर शादी के बाद महिलाओं से ही पति और परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों का ख्याल रखने की उम्मीद क्यों की जाती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने लिए भी समय निकालना चाहिए और उनकी जिंदगी केवल पति, बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

सुनीता ने घरेलू जिम्मेदारियों में असमानता पर बात करते हुए कहा कि जिस तरह पत्नी से पति की जरूरतों का ध्यान रखने की अपेक्षा की जाती है, उसी तरह पति को भी पत्नी की देखभाल और जिम्मेदारियों में बराबर भागीदारी करनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी रिश्ते में देखभाल एकतरफा नहीं होनी चाहिए।

पति की हर जरूरत पूरी करना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी क्यों?

सुनीता ने महिलाओं से जुड़ी पारंपरिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि अक्सर पत्नी से उम्मीद की जाती है कि वह पति की हर छोटी-बड़ी जरूरत पूरी करे। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि वह भी पहले ऐसा करती थीं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई घरों में पत्नी से पति के कपड़े, मोजे और दूसरी व्यक्तिगत जरूरतों का ध्यान रखने की अपेक्षा की जाती है। सुनीता का सवाल था कि अगर पत्नी पति के लिए ये सब कर सकती है तो पति भी पत्नी के लिए वही जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा सकता?

उनकी बात का मुख्य संदेश यही था कि शादी में जिम्मेदारियां दोनों की होनी चाहिए। किसी एक व्यक्ति पर घर और रिश्ते की पूरी जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है।

“क्या हमारी जिंदगी सिर्फ पति और बच्चों के लिए है?”

सुनीता की बातचीत का सबसे चर्चित हिस्सा तब सामने आया जब उन्होंने महिलाओं की व्यक्तिगत पहचान को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना था कि शादी के बाद महिला की पूरी जिंदगी सिर्फ पति, बच्चों, सास-ससुर और परिवार की सेवा तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि आखिर महिला की अपनी जिंदगी कहां है?

शादी और परिवार किसी महिला के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन उसके व्यक्तित्व और पहचान को केवल इन्हीं भूमिकाओं से नहीं देखा जाना चाहिए। महिला एक पत्नी और मां होने के साथ-साथ अपनी पसंद, रुचियों, दोस्तों, करियर, यात्रा और व्यक्तिगत समय को भी महत्व दे सकती है।

यह सोच खास तौर पर उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो लंबे समय तक परिवार की जरूरतों को अपनी प्राथमिकता बनाकर खुद के लिए समय निकालना भूल जाती हैं।

महिलाओं के लिए अकेले समय बिताना क्यों जरूरी?

सुनीता ने महिलाओं को सलाह दी कि उन्हें समय-समय पर परिवार से अलग अपने लिए कुछ समय निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला पूरे साल पति और बच्चों के साथ रहती है तो कुछ दिन अपने लिए निकालना गलत नहीं है।

उन्होंने महिलाओं को अकेले घूमने या कुछ दिनों के लिए खुद के साथ समय बिताने की बात कही। इसका मतलब परिवार से दूरी बनाना नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और मानसिक शांति के लिए समय निकालना है।

सुनीता के मुताबिक, किसी महिला का अकेले समय बिताना यह नहीं दर्शाता कि वह अपने परिवार से प्यार नहीं करती। बल्कि यह उसे अपने व्यक्तित्व और पसंद को समझने का अवसर दे सकता है।

12 साल से खुद के लिए समय निकाल रही हैं सुनीता

Sunita Ahuja on Marriage Roles

सुनीता ने बताया कि वह पिछले करीब 12 वर्षों से अकेले बाहर जाने और अपने लिए समय निकालने की आदत को महत्व देती रही हैं इससे पहले भी वह अपने जन्मदिन अकेले मनाने और खुद के साथ समय बिताने को लेकर बात कर चुकी हैं। 2025 में उन्होंने बताया था कि वह 12 वर्षों से अपने जन्मदिन पर अकेले यात्रा करती रही हैं और महिलाओं को भी अपने लिए समय निकालने की सलाह देती हैं।

उनके अनुसार, अकेले समय बिताने से व्यक्ति खुद से बातचीत कर सकता है और अपनी पसंद-नापसंद को बेहतर तरीके से समझ सकता है। उन्होंने प्रकृति के साथ समय बिताने की बात भी कही।

यह विचार आज के समय में इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि परिवार की जिम्मेदारियों के बीच महिलाओं के लिए व्यक्तिगत समय अक्सर सबसे पहले खत्म होता है।

जरूरी नहीं कि हर महिला चार दिन की यात्रा करे

सुनीता की बात का मतलब यह नहीं है कि हर महिला को अपने परिवार से दूर जाकर चार दिन की यात्रा करनी ही चाहिए। असल संदेश यह है कि महिलाओं को अपनी जरूरतों और पसंद के लिए नियमित रूप से कुछ समय जरूर निकालना चाहिए।

यह समय किसी यात्रा के रूप में हो सकता है। कोई महिला अकेले कॉफी पीने जा सकती है, किताब पढ़ सकती है, पार्क में घूम सकती है, अपनी सहेलियों के साथ समय बिता सकती है या अपनी पसंद का कोई काम कर सकती है।

जरूरी यह है कि वह समय केवल उसका अपना हो और उसे हर पल किसी दूसरी जिम्मेदारी के लिए उपलब्ध रहने की मजबूरी महसूस न हो।

परिवार की जिम्मेदारियां साझा करना भी जरूरी

सुनीता की बात का एक अहम पहलू परिवार में जिम्मेदारियों के बंटवारे से जुड़ा है। यदि घर का हर काम हमेशा एक ही व्यक्ति करता रहेगा तो बाकी सदस्यों को भी उन जिम्मेदारियों को समझने और निभाने का अवसर नहीं मिलेगा।

पति और पत्नी दोनों को बच्चों, घर और अन्य जरूरी कामों में सहयोग करना चाहिए। इससे किसी एक व्यक्ति पर लगातार दबाव कम हो सकता है।

अगर कोई महिला कुछ समय के लिए घर से बाहर जाती है तो परिवार के बाकी सदस्यों को भी अपनी जिम्मेदारियां संभालने का अवसर मिलता है। इससे परिवार में जिम्मेदारी साझा करने की संस्कृति मजबूत हो सकती है।

हर समय जरूरी बने रहना ही प्यार की निशानी नहीं

कई महिलाएं परिवार की हर छोटी-बड़ी जरूरत पूरी करने को अपना कर्तव्य मानती हैं। परिवार के लिए मौजूद रहना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन हर समय हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध रहना जरूरी नहीं है।

किसी महिला की अहमियत केवल इस बात से तय नहीं होती कि घर में कितने लोग उसकी मदद पर निर्भर हैं। परिवार में प्यार, सम्मान और जिम्मेदारी का रिश्ता एक-दूसरे के सहयोग पर आधारित होना चाहिए।

महिलाओं को यह समझना जरूरी है कि अपने लिए समय निकालना स्वार्थ नहीं है। अपनी पसंद और जरूरतों को महत्व देना भी स्वस्थ जीवन का हिस्सा है।

शादी के बाद भी अपनी पहचान बनाए रखना जरूरी

सुनीता की बात का एक और महत्वपूर्ण पहलू महिला की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ा है। शादी के बाद महिला पत्नी, मां, बहू और अन्य पारिवारिक भूमिकाएं निभाती है, लेकिन उसकी अपनी पहचान भी बनी रहनी चाहिए।

किसी women का कोई शौक हो सकता है, दोस्त हो सकते हैं, करियर हो सकता है या घूमने-फिरने की इच्छा हो सकती है। इन चीजों को शादी के बाद पूरी तरह छोड़ देना जरूरी नहीं है।

व्यक्तिगत पहचान बनाए रखने से महिला को अपने जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण मिल सकता है। परिवार के साथ-साथ अपने लिए जगह बनाना रिश्तों को कमजोर करने के बजाय कई बार उन्हें बेहतर तरीके से निभाने में मदद कर सकता है।

Sunita Ahuja की बात का असली संदेश क्या है?

Sunita Ahuja

सुनीता अटकलों या किसी खास वैवाहिक विवाद पर बात करने के बजाय महिलाओं की जिंदगी में व्यक्तिगत समय और स्वतंत्र पहचान की जरूरत पर जोर देती नजर आईं। उनका संदेश यह है कि परिवार की देखभाल करते हुए महिला को खुद को नहीं भूलना चाहिए।

उनकी बात का अर्थ यह भी नहीं है कि पति या बच्चों से दूरी बनाना जरूरी है। बल्कि परिवार के साथ रहते हुए भी अपने लिए कुछ समय, पसंद और स्वतंत्रता रखना जरूरी है।

निष्कर्ष

Sunita Ahuja की महिलाओं और विवाह की भूमिकाओं पर कही गई बातें सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन गई हैं। उनका सवाल सीधा है—क्या महिला की जिंदगी केवल पति, बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित होनी चाहिए?

उनकी राय में महिलाओं को अपने लिए समय निकालना चाहिए, अपनी पसंद को महत्व देना चाहिए और परिवार की जिम्मेदारियों को साझा करने की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने खुद के लिए समय निकालने और अकेले यात्रा करने के अपने अनुभव का भी उल्लेख किया है।

इस पूरी चर्चा का सबसे अहम संदेश यही है कि परिवार महत्वपूर्ण है, लेकिन महिला की अपनी पहचान और जिंदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। शादी और मातृत्व जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं, लेकिन वे किसी महिला की पूरी पहचान नहीं हैं।

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