राजौरी (जम्मू-कश्मीर): सीमावर्ती क्षेत्रों से अक्सर चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों की कहानियां सामने आती हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के एक 17 वर्षीय छात्र ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। राजौरी जिले के दूंगी (Doongi) गांव के रहने वाले इमरान चौधरी ने महज छह महीने में अपनी AI आधारित EdTech कंपनी Lagnever Technologies Private Limited को करीब ₹5 करोड़ की वैल्यूएशन तक पहुंचाकर एक नई मिसाल कायम की है।
आज Imran Chaudhary AI Startup देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इतनी कम उम्र में एक सफल स्टार्टअप खड़ा करना और हजारों छात्रों तक अपनी तकनीक पहुंचाना न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
छोटे गांव से बड़े सपनों तक का सफर
राजौरी जिले का दूंगी गांव नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब स्थित एक सीमावर्ती इलाका है। यहां आधुनिक तकनीकी संसाधन और बड़े शहरों जैसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद इमरान ने अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया।
उन्होंने बचपन से ही तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में रुचि दिखाई। इंटरनेट और ऑनलाइन संसाधनों की मदद से उन्होंने नई-नई तकनीकों को सीखना शुरू किया और शिक्षा के क्षेत्र में AI के उपयोग पर काम करने का निर्णय लिया।
इमरान का मानना है कि अच्छी शिक्षा हर छात्र तक पहुंचनी चाहिए, चाहे वह किसी बड़े शहर में रहता हो या किसी दूरदराज गांव में। इसी सोच ने उन्हें अपना स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा दी।
छह महीने में बनी ₹5 करोड़ की कंपनी
इमरान ने Lagnever Technologies Private Limited की शुरुआत एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ की—AI की मदद से छात्रों के लिए पढ़ाई को आसान, स्मार्ट और अधिक प्रभावी बनाना।
कंपनी द्वारा विकसित Lagnever AI एप्लिकेशन को लॉन्च के कुछ ही महीनों में 10,000 से अधिक डाउनलोड मिले। कंपनी का दावा है कि इस तेजी से बढ़ते उपयोगकर्ता आधार और बिजनेस ग्रोथ के चलते स्टार्टअप की वैल्यूएशन छह महीने के भीतर ₹5 करोड़ तक पहुंच गई।
इतनी कम अवधि में किसी युवा उद्यमी के लिए यह उपलब्धि बेहद खास मानी जा रही है।
क्या है Lagnever AI?

Lagnever AI एक AI आधारित शिक्षा मंच (EdTech Platform) है, जिसे छात्रों की पढ़ाई को अधिक आसान और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
इस ऐप में कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं—
- AI आधारित स्टडी असिस्टेंट
- स्मार्ट नोट्स तैयार करने की सुविधा
- क्विज और टेस्ट
- करियर गाइडेंस
- व्यक्तिगत अध्ययन सहायता
- सीखने की प्रगति का विश्लेषण
कंपनी का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म शिक्षकों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि कक्षा में होने वाली पढ़ाई को और बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।
सीमित संसाधनों ने नहीं रोकी उड़ान
इमरान ने कहा कि सीमावर्ती गांव में रहने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को छोटा नहीं होने दिया।
उनका मानना है कि यदि सीखने की इच्छा हो तो इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म किसी भी छात्र के लिए नए अवसर खोल सकते हैं।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर आसान नहीं था। तकनीकी चुनौतियों के साथ-साथ लोगों तक अपने प्लेटफॉर्म की जानकारी पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन लगातार मेहनत और टीमवर्क के दम पर उन्होंने इन मुश्किलों को पार किया।
टीमवर्क बना सफलता की सबसे बड़ी ताकत
इमरान अपनी सफलता का श्रेय केवल खुद को नहीं देते। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी 12 सदस्यीय टीम ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।
इस टीम में कई युवा प्रोफेशनल्स और छात्र शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं।
प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं—
- अनीस अज़ीज़ – Chief Operating Officer (COO)
- सरफराज हुसैन – Director
- मोहिब अल्ताफ – Chief Marketing Officer (CMO)
- अर्नब बलगोत्रा – Social Media Manager
- शोएब कुरैशी – Social Media Manager
इमरान ने विशेष रूप से मोहिब अल्ताफ का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ऐप के प्रचार-प्रसार और अधिक छात्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शुरुआत में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
हर स्टार्टअप की तरह Lagnever Technologies को भी शुरुआती दिनों में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सबसे बड़ी चुनौती थी लोगों को यह समझाना कि AI आधारित शिक्षा वास्तव में उनकी पढ़ाई में कैसे मदद कर सकती है।
कंपनी के पास शुरुआत में सीमित संसाधन थे और मार्केटिंग के लिए भी बड़े बजट उपलब्ध नहीं थे। इसके बावजूद टीम ने सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और छात्रों की प्रतिक्रिया के आधार पर अपने उत्पाद को लगातार बेहतर बनाया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मिली पहचान
इमरान की उपलब्धियां केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं।
उन्हें BlackRock से जुड़े एक प्रतिष्ठित Global Founders Programme के लिए चुना गया है। इस कार्यक्रम में दुनिया भर से केवल 60 युवा उद्यमियों का चयन किया गया है।

यह चयन उनके लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे भारतीय युवाओं की वैश्विक मंच पर बढ़ती पहचान भी दिखाई देती है।
बेंगलुरु में मिलेगा सीखने का अवसर
इस कार्यक्रम के तहत इमरान छह महीने तक बेंगलुरु में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
इस दौरान उन्हें—
- वैश्विक स्टार्टअप विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिलेगा।
- विभिन्न देशों के उद्यमियों के साथ नेटवर्किंग करने का मौका मिलेगा।
- वास्तविक समस्याओं पर तकनीकी समाधान विकसित करने का अनुभव मिलेगा।
- अपने स्टार्टअप को वैश्विक स्तर तक ले जाने की रणनीति सीखने का अवसर मिलेगा।
इमरान का मानना है कि यह अनुभव उनकी कंपनी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
जम्मू-कश्मीर के लिए क्यों खास है यह उपलब्धि?
Lagnever AI को जम्मू-कश्मीर के शुरुआती AI आधारित EdTech प्लेटफॉर्म्स में से एक माना जा रहा है।
इमरान और उनकी टीम का कहना है कि यदि स्थानीय स्टार्टअप्स को सरकार और प्रशासन का अधिक सहयोग मिले, तो जम्मू-कश्मीर भी देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी हब के रूप में उभर सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में AI और शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक नवाचार देखने को मिलेंगे।
भारत में तेजी से बढ़ रहा है AI का उपयोग
देशभर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
नई शिक्षा नीति और डिजिटल इंडिया जैसे प्रयासों के बाद AI आधारित लर्निंग प्लेटफॉर्म्स की मांग भी लगातार बढ़ी है।
इसी बदलते माहौल में Lagnever AI जैसे स्टार्टअप युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
भविष्य की क्या है योजना?
इमरान का सपना केवल एक सफल कंपनी बनाना नहीं है।
वे चाहते हैं कि भविष्य में ऐसा AI आधारित शिक्षा प्लेटफॉर्म तैयार हो जहां देश के किसी भी हिस्से में रहने वाला छात्र अपनी जरूरत के अनुसार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके।
उनका लक्ष्य AI की मदद से शिक्षा को अधिक व्यक्तिगत (Personalized), आसान और सभी के लिए सुलभ बनाना है।
युवाओं के लिए प्रेरणा

17 साल की उम्र में इमरान चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि सफलता उम्र या स्थान की मोहताज नहीं होती।
सीमावर्ती गांव से निकलकर करोड़ों रुपये की वैल्यूएशन वाली कंपनी बनाना इस बात का उदाहरण है कि सही सोच, मेहनत और तकनीक के उपयोग से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उनकी सफलता उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं।
निष्कर्ष
Imran Chaudhary AI Startup की सफलता केवल एक स्टार्टअप की कहानी नहीं, बल्कि यह नवाचार, शिक्षा और युवाओं की क्षमता का प्रतीक है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर इमरान चौधरी ने Lagnever Technologies के माध्यम से दिखाया है कि प्रतिभा को अवसर मिले तो वह वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकती है।
यदि कंपनी अपनी विकास यात्रा इसी गति से जारी रखती है, तो आने वाले वर्षों में यह भारत के प्रमुख AI आधारित EdTech प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो सकती है।
