Sonam Wangchuk Case: AIIMS के बाद Safdarjung Hospital RDA ने भी राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की

admin
By
admin
6 Min Read
Resident Doctors' Associations of AIIMS and Safdarjung Hospital seek the President's intervention over the Sonam Wangchuk Case, citing concerns about patient rights and medical ethics.

Sonam Wangchuk Case को लेकर दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों के Resident Doctors’ Associations ने उठाए सवाल, चिकित्सा नैतिकता और मरीजों के अधिकारों पर जताई चिंता

New Delhi: Sonam Wangchuk Case को लेकर देश के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों के Resident Doctors’ Associations (RDA) ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप की मांग की है। AIIMS के बाद अब VMMC एवं Safdarjung Hospital के रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन ने भी राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर मरीजों के अधिकार, चिकित्सा नैतिकता और अस्पतालों की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की है।

डॉक्टरों के संगठन का कहना है कि अस्पताल उपचार और सेवा के केंद्र होने चाहिए तथा उनकी कार्यप्रणाली पूरी तरह चिकित्सकीय निर्णयों और स्थापित नैतिक मानकों के अनुरूप होनी चाहिए।

राष्ट्रपति को भेजा चार पन्नों का ज्ञापन

Safdarjung Hospital RDA ने राष्ट्रपति को भेजे गए चार पन्नों के ज्ञापन में कहा कि Sonam Wangchuk की स्वास्थ्य स्थिति और अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता का निर्णय केवल स्वतंत्र चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर होना चाहिए।

संगठन ने कहा कि यदि कोई मरीज चिकित्सकीय रूप से सक्षम है, तो उसे गरिमा, सूचित सहमति (Informed Consent) और कानून के अनुरूप चिकित्सा संबंधी निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए।

मरीजों के अधिकारों पर उठाए सवाल

ज्ञापन में कहा गया कि यदि यह सही है कि एक सक्षम मरीज को Leave Against Medical Advice (LAMA) लेने की अनुमति नहीं दी गई, तो यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सूचित सहमति और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

RDA का कहना है कि अस्पतालों को उपचार और देखभाल का स्थान माना जाना चाहिए, न कि ऐसी जगह जहां किसी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के रोका जाए।

Safdarjung Hospital की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चिंता

डॉक्टरों के संगठन ने अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

ज्ञापन में कहा गया कि यदि अस्पताल के कुछ हिस्सों में प्रवेश सीमित किया गया, बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती हुई और नियमित चिकित्सा सेवाओं पर इसका प्रभाव पड़ा, तो इन परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

संगठन का कहना है कि किसी भी अस्पताल की प्राथमिक जिम्मेदारी मरीजों की देखभाल है और ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए जिससे उपचार प्रक्रिया प्रभावित हो।

Jantar Mantar घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच की मांग

Safdarjung RDA ने Jantar Mantar पर हुए घटनाक्रम की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की भी मांग की है।

ज्ञापन में मीडिया रिपोर्टों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, लाठीचार्ज या आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।

Lady Hardinge Medical College से जुड़े आरोपों का भी जिक्र

RDA ने अपने ज्ञापन में Lady Hardinge Medical College के कुछ फैकल्टी सदस्यों और छात्रों से जुड़े कथित डराने-धमकाने और शारीरिक दुर्व्यवहार के आरोपों का भी उल्लेख किया।

संगठन ने कहा कि इन आरोपों की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और संस्थानों में विश्वास कायम रहे।

चिकित्सा संस्थानों की स्वतंत्रता पर जोर

डॉक्टरों के संगठन ने कहा कि अस्पतालों का संचालन चिकित्सा नैतिकता और मरीजों के हितों के आधार पर होना चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया कि अस्पताल प्रशासन को किसी भी प्रकार के गैर-चिकित्सीय या राजनीतिक प्रभाव से स्वतंत्र रहना चाहिए ताकि जनता का भरोसा चिकित्सा संस्थानों पर बना रहे।

AIIMS RDA भी कर चुका है अपील

इससे पहले AIIMS Resident Doctors’ Association ने भी राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की थी। AIIMS RDA ने भी मरीजों की स्वायत्तता, संवैधानिक अधिकारों और चिकित्सा नैतिकता को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

अब देश के दो प्रमुख सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के संगठन इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी चिंता दर्ज करा चुके हैं।

RDA की प्रमुख मांगें

Safdarjung RDA ने अपने ज्ञापन में कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • Jantar Mantar घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच।
  • सक्षम मरीजों को कानूनी रूप से Leave Against Medical Advice (LAMA) का अधिकार सुनिश्चित करना।
  • अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था से मरीजों और चिकित्सा सेवाओं पर पड़े प्रभाव की समीक्षा।
  • यदि चिकित्सा नैतिकता या संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ हो तो जवाबदेही तय करना।
  • स्वास्थ्यकर्मियों को किसी भी प्रकार के दबाव, हिंसा या डराने-धमकाने से सुरक्षा प्रदान करना।

निष्कर्ष

Safdarjung Hospital RDA

Sonam Wangchuk Case अब केवल एक व्यक्ति की चिकित्सा देखभाल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह चिकित्सा नैतिकता, मरीजों के अधिकार और सरकारी अस्पतालों की संस्थागत स्वतंत्रता पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। AIIMS और Safdarjung Hospital के Resident Doctors’ Associations द्वारा राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग के बाद इस पूरे मामले पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान केंद्रित हो गया है। अब आगे की कार्रवाई और किसी भी संभावित जांच पर सभी की नजर बनी हुई है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *